शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर धर्म रक्षा सेना के कार्यकर्ताओं ने किया सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान

श्रीफल, पुष्प एवं भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप की छायाचित्र, हनुमान चालीसा की पुस्तक किया सप्रेम भेंट

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एक साथ 25 टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर निवासरत सेवानिवृत्त शिक्षकों का घर घर जाकर किया सम्मान ,शिक्षकों ने किया धर्म रक्षा सेना के कार्यकर्ताओं का आभार प्रगट

धर्म रक्षा सेना द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान का प्रत्येक शिक्षक ने किया समर्थन ,प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी को लेकर लिखा मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड

 

 

केवलारी – हमारे जीवन, समाज और देश में शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने के लिये हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। क्योंकि हम सभी के जीवन में शिक्षा एवं शिक्षक का विशेष महत्व है। शिक्षक हमें जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया अपनाना सिखाते हैं। एक अच्छा शिक्षक वो होता है जो अपने पूरे जीवन में विद्यार्थियों को केवल देता है ,लेकिन कुछ भी लेता नहीं है । एक बेहतरीन शिक्षक वो होता है जो अपने राष्ट्र के लिये एक बेहतरीन भविष्य की पीढ़ी उपलब्ध कराता है, इसीलिए शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता की उपाधि दी गई है। 5 सितंबर के दिन शिक्षक दिवस मनाने के पीछे का कारण यह है की 5 सितंबर को ही भारत के पूर्व राष्ट्रपति, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन था। वो शिक्षा के प्रति अत्यधिक समर्पित थे और एक अध्येता, राजनयिक, भारत के राष्ट्रपति एवं खासतौर से एक शिक्षक के रुप में जाने जाते थे। उल्लेखनीय होगा कि 1962 में वह भारत के राष्ट्रपति बने तो कुछ विद्यार्थियों ने 5 सितंबर को उनका जन्मदिन मनाने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को मेरा जन्म दिन मनाने के बजाय क्यों नहीं इस दिन को अध्यापन के प्रति मेरे समर्पण के लिये शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाये। उनके इस कथन के बाद पूरे भारत भर में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाने लगा। कहा जाता है कि किसी भी पेशे की तुलना अध्यापन से नहीं की जा सकती। ये दुनिया का सबसे नेक कार्य है। पूरे भारत में शिक्षक दिवस के रुप में इस दिन को मनाने के द्वारा 5 सितंबर को अध्यापन पेशे को समर्पित किया गया है। शिक्षकों को सम्मान देने और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को याद करने के लिये हर साल इसे मनाया जाता है। देश के विकास और समाज में हमारे शिक्षकों के योगदान के साथ ही अध्यापन पेशे की महानता को उल्लेखित करने के लिये हमारे पूर्व राष्ट्रपति के जन्मदिवस को समर्पित किया गया है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षक थे जिन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष अध्यापन पेशे को दिया है। वो विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षकों के योगदान और भूमिका के लिये प्रसिद्ध थे। इसलिये वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने शिक्षकों के बारे में सोचा और हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाने का अनुरोध किया। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था और 1909 में चेन्नई के प्रेसिडेंसी कॉलेज में अध्यापन पेशे में प्रवेश करने के द्वारा दर्शनशास्त्र शिक्षक के रुप में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने देश में बनारस, चेन्नई, कोलकाता, मैसूर जैसे कई प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों तथा विदेशों में लंदन के ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों में दर्शनशास्त्र पढ़ाया है। अध्यापन पेशे के प्रति अपने समर्पण की वजह से उन्हें अपने बहुमूल्य सेवा की पहचान के लिये 1949 में विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति कमीशन के अध्यक्ष के रुप में नियुक्त किया गया। 1962 से शिक्षक दिवस के रुप में 5 सितंबर को मनाने की शुरुआत हुई। अपने महान कार्यों से देश की लंबे समय तक सेवा करने के बाद 17 अप्रैल 1975 को इनका निधन हो गया।शिक्षक विद्यार्थियो के जीवन के वास्तविक कुम्हार होते हैं जो न सिर्फ हमारे जीवन को आकार देते हैं बल्कि हमें इस काबिल बनाते हैं कि हम पूरी दुनिया में अंधकार होने के बाद भी प्रकाश की तरह जलते रहें। इस वजह से हमारा राष्ट्र ढ़ेर सारे प्रकाश के साथ प्रबुद्ध हो सकता है। इसलिये, देश में सभी शिक्षकों को सम्मान दिया जाता है। हमें पूरे दिल से ये प्रतिज्ञा करनी चाहिये कि हम अपने शिक्षक का सम्मान करेंगे क्योंकि बिना शिक्षक के इस दुनिया में हम सभी अधूरे हैं। इसी से प्रेरणा लेकर धर्म रक्षा सेना द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर सेवानिवृत्तत हुुए पूज्यनीय शिक्षकों का घर घर जाकर सम्मान किया गया एवं उन्हें पुष्प, श्रीफल एवं भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप की छायाचित्र, हनुमान चालीसा की पुस्तक संप्रेम भेंट में दे कर उनसे आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन लिया गया। इसके साथ ही शिक्षकों द्वारा धर्म रक्षा सेना द्वारा चलाए जा रहेे नशा मुक्ति अभियान का समर्थन किया गया एवं प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी को पोस्टकार्ड लिखकर प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी करने का निवेदन किया गया।

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श्रीफल, पुष्प एवं भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप की छायाचित्र, हनुमान चालीसा की पुस्तक किया सप्रेम भेंट

 

एक साथ 25 टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर निवासरत सेवानिवृत्त शिक्षकों का घर घर जाकर किया सम्मान ,शिक्षकों ने किया धर्म रक्षा सेना के कार्यकर्ताओं का आभार प्रगट

धर्म रक्षा सेना द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान का प्रत्येक शिक्षक ने किया समर्थन ,प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी को लेकर लिखा मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड

 

 

केवलारी – हमारे जीवन, समाज और देश में शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने के लिये हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है। क्योंकि हम सभी के जीवन में शिक्षा एवं शिक्षक का विशेष महत्व है। शिक्षक हमें जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया अपनाना सिखाते हैं। एक अच्छा शिक्षक वो होता है जो अपने पूरे जीवन में विद्यार्थियों को केवल देता है ,लेकिन कुछ भी लेता नहीं है । एक बेहतरीन शिक्षक वो होता है जो अपने राष्ट्र के लिये एक बेहतरीन भविष्य की पीढ़ी उपलब्ध कराता है, इसीलिए शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता की उपाधि दी गई है। 5 सितंबर के दिन शिक्षक दिवस मनाने के पीछे का कारण यह है की 5 सितंबर को ही भारत के पूर्व राष्ट्रपति, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन था। वो शिक्षा के प्रति अत्यधिक समर्पित थे और एक अध्येता, राजनयिक, भारत के राष्ट्रपति एवं खासतौर से एक शिक्षक के रुप में जाने जाते थे। उल्लेखनीय होगा कि 1962 में वह भारत के राष्ट्रपति बने तो कुछ विद्यार्थियों ने 5 सितंबर को उनका जन्मदिन मनाने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को मेरा जन्म दिन मनाने के बजाय क्यों नहीं इस दिन को अध्यापन के प्रति मेरे समर्पण के लिये शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाये। उनके इस कथन के बाद पूरे भारत भर में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाने लगा। कहा जाता है कि किसी भी पेशे की तुलना अध्यापन से नहीं की जा सकती। ये दुनिया का सबसे नेक कार्य है। पूरे भारत में शिक्षक दिवस के रुप में इस दिन को मनाने के द्वारा 5 सितंबर को अध्यापन पेशे को समर्पित किया गया है। शिक्षकों को सम्मान देने और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को याद करने के लिये हर साल इसे मनाया जाता है। देश के विकास और समाज में हमारे शिक्षकों के योगदान के साथ ही अध्यापन पेशे की महानता को उल्लेखित करने के लिये हमारे पूर्व राष्ट्रपति के जन्मदिवस को समर्पित किया गया है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षक थे जिन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष अध्यापन पेशे को दिया है। वो विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षकों के योगदान और भूमिका के लिये प्रसिद्ध थे। इसलिये वो पहले व्यक्ति थे जिन्होंने शिक्षकों के बारे में सोचा और हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाने का अनुरोध किया। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था और 1909 में चेन्नई के प्रेसिडेंसी कॉलेज में अध्यापन पेशे में प्रवेश करने के द्वारा दर्शनशास्त्र शिक्षक के रुप में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने देश में बनारस, चेन्नई, कोलकाता, मैसूर जैसे कई प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों तथा विदेशों में लंदन के ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों में दर्शनशास्त्र पढ़ाया है। अध्यापन पेशे के प्रति अपने समर्पण की वजह से उन्हें अपने बहुमूल्य सेवा की पहचान के लिये 1949 में विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति कमीशन के अध्यक्ष के रुप में नियुक्त किया गया। 1962 से शिक्षक दिवस के रुप में 5 सितंबर को मनाने की शुरुआत हुई। अपने महान कार्यों से देश की लंबे समय तक सेवा करने के बाद 17 अप्रैल 1975 को इनका निधन हो गया।शिक्षक विद्यार्थियो के जीवन के वास्तविक कुम्हार होते हैं जो न सिर्फ हमारे जीवन को आकार देते हैं बल्कि हमें इस काबिल बनाते हैं कि हम पूरी दुनिया में अंधकार होने के बाद भी प्रकाश की तरह जलते रहें। इस वजह से हमारा राष्ट्र ढ़ेर सारे प्रकाश के साथ प्रबुद्ध हो सकता है। इसलिये, देश में सभी शिक्षकों को सम्मान दिया जाता है। हमें पूरे दिल से ये प्रतिज्ञा करनी चाहिये कि हम अपने शिक्षक का सम्मान करेंगे क्योंकि बिना शिक्षक के इस दुनिया में हम सभी अधूरे हैं। इसी से प्रेरणा लेकर धर्म रक्षा सेना द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य पर सेवानिवृत्तत हुुए पूज्यनीय शिक्षकों का घर घर जाकर सम्मान किया गया एवं उन्हें पुष्प, श्रीफल एवं भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप की छायाचित्र, हनुमान चालीसा की पुस्तक संप्रेम भेंट में दे कर उनसे आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन लिया गया। इसके साथ ही शिक्षकों द्वारा धर्म रक्षा सेना द्वारा चलाए जा रहेे नशा मुक्ति अभियान का समर्थन किया गया एवं प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान जी को पोस्टकार्ड लिखकर प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी करने का निवेदन किया गया।

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