ग्रामीणों ने लगाए सरपंच सचिव एवं रोजगार सहायक पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

खुले में शौच करने को मजबूर ग्रामीण महिलाएं

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सरपंच सचिव एवं रोजगार सहायक ने डकारी शौचालय निर्माण की राशि

केवलारी विधानसभा के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेखा (पांजरा) का मामला

केवलारी। सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेखा (पांजरा) में इन दिनों सरपंच सचिव एवं रोजगार सहायक की लापरवाही मनमानी एवं खुलेआम भ्रष्टाचार के चलते ग्रामीणजन खासे परेशान नजर आ रहे हैं, वहीं शासन प्रशासन की उदासीनता भी साफ झलक रही है, लाख शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है, जिसके परिणाम स्वरूप इन जनप्रतिनिधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं इन्हें शासन प्रशासन का कोई खौफ नहीं है।
आपको बता दें कि एक तरफ़ केन्द्र एवं राज्य की सरकार दावा करती है कि उन्होंने देश को खुले में शौच से मुक्त करा दिया है, जिसके लिए सरकार ने करोड़ों अरबों रुपये खर्च किये हैं, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बैठे आलाधिकारी समेत जनप्रतिनिधियों ने शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। आपको बता दें कि केवलारी विधानसभा क्षेत्र में ऐसे अनेकों ग्राम हैं जहां आज भी ग्रामीणजन खुले में शौच करने को मजबूर हैं, इन ग्रामीणों के यहां देखने को तो शौचालय बने हुए हैं किंतु आधे अधूरे बने हैं, किसी मे टैंक नही हैं, तो किसी मे सीट नही हैं, तो किसी मे दरवाजा नहीं है, देखा गया कि ग्राम पंचायत द्वारा बनाये गए एक भी शौचालय उपयोग हेतु नही है। इन शौचालय का उपयोग सिर्फ नहाने या अन्य किसी सामग्री रखने के उपयोग में लाया जा रहा है। ग्रामीणजन आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
दरसल मामला केवलारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेखा (पांजरा) का है, जहां की महिलाओं ने अपनी गम्भीर समस्याओं से मीडिया को रूबरू कराया, उन्होंने बताया कि शासन की योजना अंतर्गत उनके घरों में शौचालय निर्माण किया जाना था, जिसे ग्राम पंचायत द्वारा प्रत्येक घर में निर्माण कराया गया है। लेकिन शौंचालय निर्माण पूर्ण नहीं किया गया, जहां कहीं शुरूआत हुई भी उसे भी आधा अधूरा ही छोड़ दिया गया है। यहां करीब सैकड़ों से अधिक शौंचालय आधे अधूरी स्थिति में मिले। किसी शौंचालय की केवल दीवार खड़ी मिली तो, किसी में गड्ढे ही नहीं बनवाए गए थे। किसी शौंचालय में सीट नहीं लगी तो किसी में दरवाजे ही नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि शौंचालय निर्माण की पूरी राशि सरपंच-सचिव एवं रोजगार सहायक के द्वारा आहरित कर ली गई है। लेकिन शौंचालय का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया, जिससे अधूरे शौंचालय कबाड़ की स्थिति में पड़े हुए हैं और इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान के तहत शुरू खुले में शौच मुक्त भारत योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इसकी परत-दर-परत अब खुलने लगी है। बताया जा रहा है कि शौचलाय ज्यादातर मामलो में शौचालयों का निर्माण ही नहीं हुआ, जहां कहीं इसकी शुरूआत भी हुई तो महज कागजी खानापूरी तक ही सीमित रहा। लेकिन योजना मत की पूरी धनराशि जरूर निकाल ली गई।
आपको बता दें कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत वर्ष 2017-18 में जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायतों के माध्यम से गांवों में घर-घर शौचालय निर्माण का अभियान शुरू किया। खूब प्रचार-प्रसार हुआ। कहा गया कि अब कोई खुले में शौच करने नहीं जाएगा। बैनर-पोस्टर लगाए गए, वॉल राइटिंग हुई, कइयों पर जुर्माना भी लगा, लेकिन इसकी हकीकत बताता है  जनपद पंचायत केवलारी अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेखा में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौंचालय निर्माण के करीब सैकड़ों से अधिक लाभार्थियों के शौंचालय निर्माण की राशि का आहरण तो कर लिया गया, लेकिन शौंचालय निर्माण नहीं किया गया, जहां कहीं शुरूआत हुई भी उसे भी आधा अधूरा ही छोड़ दिया गया है।
ग्रामीणों की शिकायत पर हमारी टीम ने गांव की पड़ताल की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। यहां करीब सैकड़ों से अधिक शौंचालय आधे अधूरी स्थिति में मिले। किसी शौंचालय की केवल दीवार खड़ी मिली तो, किसी में गड्ढे ही नहीं बनवाए गए थे। किसी शौंचालय में सीट नहीं लगी तो किसी में दरवाजे ही नहीं लगाए गए थे।
वहीं ग्रामीणों ने जिले के संवेदनशील कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट कराते हुए उक्त घोटाले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और अधूरे शौंचालयों को पूर्ण कराने की मांग की है।

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खुले में शौच करने को मजबूर ग्रामीण महिलाएं

सरपंच सचिव एवं रोजगार सहायक ने डकारी शौचालय निर्माण की राशि

केवलारी विधानसभा के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेखा (पांजरा) का मामला

केवलारी। सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेखा (पांजरा) में इन दिनों सरपंच सचिव एवं रोजगार सहायक की लापरवाही मनमानी एवं खुलेआम भ्रष्टाचार के चलते ग्रामीणजन खासे परेशान नजर आ रहे हैं, वहीं शासन प्रशासन की उदासीनता भी साफ झलक रही है, लाख शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है, जिसके परिणाम स्वरूप इन जनप्रतिनिधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं इन्हें शासन प्रशासन का कोई खौफ नहीं है।
आपको बता दें कि एक तरफ़ केन्द्र एवं राज्य की सरकार दावा करती है कि उन्होंने देश को खुले में शौच से मुक्त करा दिया है, जिसके लिए सरकार ने करोड़ों अरबों रुपये खर्च किये हैं, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में बैठे आलाधिकारी समेत जनप्रतिनिधियों ने शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। आपको बता दें कि केवलारी विधानसभा क्षेत्र में ऐसे अनेकों ग्राम हैं जहां आज भी ग्रामीणजन खुले में शौच करने को मजबूर हैं, इन ग्रामीणों के यहां देखने को तो शौचालय बने हुए हैं किंतु आधे अधूरे बने हैं, किसी मे टैंक नही हैं, तो किसी मे सीट नही हैं, तो किसी मे दरवाजा नहीं है, देखा गया कि ग्राम पंचायत द्वारा बनाये गए एक भी शौचालय उपयोग हेतु नही है। इन शौचालय का उपयोग सिर्फ नहाने या अन्य किसी सामग्री रखने के उपयोग में लाया जा रहा है। ग्रामीणजन आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
दरसल मामला केवलारी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेखा (पांजरा) का है, जहां की महिलाओं ने अपनी गम्भीर समस्याओं से मीडिया को रूबरू कराया, उन्होंने बताया कि शासन की योजना अंतर्गत उनके घरों में शौचालय निर्माण किया जाना था, जिसे ग्राम पंचायत द्वारा प्रत्येक घर में निर्माण कराया गया है। लेकिन शौंचालय निर्माण पूर्ण नहीं किया गया, जहां कहीं शुरूआत हुई भी उसे भी आधा अधूरा ही छोड़ दिया गया है। यहां करीब सैकड़ों से अधिक शौंचालय आधे अधूरी स्थिति में मिले। किसी शौंचालय की केवल दीवार खड़ी मिली तो, किसी में गड्ढे ही नहीं बनवाए गए थे। किसी शौंचालय में सीट नहीं लगी तो किसी में दरवाजे ही नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि शौंचालय निर्माण की पूरी राशि सरपंच-सचिव एवं रोजगार सहायक के द्वारा आहरित कर ली गई है। लेकिन शौंचालय का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया, जिससे अधूरे शौंचालय कबाड़ की स्थिति में पड़े हुए हैं और इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री के राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान के तहत शुरू खुले में शौच मुक्त भारत योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इसकी परत-दर-परत अब खुलने लगी है। बताया जा रहा है कि शौचलाय ज्यादातर मामलो में शौचालयों का निर्माण ही नहीं हुआ, जहां कहीं इसकी शुरूआत भी हुई तो महज कागजी खानापूरी तक ही सीमित रहा। लेकिन योजना मत की पूरी धनराशि जरूर निकाल ली गई।
आपको बता दें कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत वर्ष 2017-18 में जिला प्रशासन ने ग्राम पंचायतों के माध्यम से गांवों में घर-घर शौचालय निर्माण का अभियान शुरू किया। खूब प्रचार-प्रसार हुआ। कहा गया कि अब कोई खुले में शौच करने नहीं जाएगा। बैनर-पोस्टर लगाए गए, वॉल राइटिंग हुई, कइयों पर जुर्माना भी लगा, लेकिन इसकी हकीकत बताता है  जनपद पंचायत केवलारी अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेखा में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौंचालय निर्माण के करीब सैकड़ों से अधिक लाभार्थियों के शौंचालय निर्माण की राशि का आहरण तो कर लिया गया, लेकिन शौंचालय निर्माण नहीं किया गया, जहां कहीं शुरूआत हुई भी उसे भी आधा अधूरा ही छोड़ दिया गया है।
ग्रामीणों की शिकायत पर हमारी टीम ने गांव की पड़ताल की तो चौंकाने वाला सच सामने आया। यहां करीब सैकड़ों से अधिक शौंचालय आधे अधूरी स्थिति में मिले। किसी शौंचालय की केवल दीवार खड़ी मिली तो, किसी में गड्ढे ही नहीं बनवाए गए थे। किसी शौंचालय में सीट नहीं लगी तो किसी में दरवाजे ही नहीं लगाए गए थे।
वहीं ग्रामीणों ने जिले के संवेदनशील कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट कराते हुए उक्त घोटाले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और अधूरे शौंचालयों को पूर्ण कराने की मांग की है।

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