बाल गोविंद पाठक हुए दोषमुक्त

राजनीतिक षड्यंत्र के चलते लगाए गए थे 354, पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर झूठे आरोप !

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प्रसिद्ध अधिवक्ता विनोद राय ने की थी पैरवी ।

सिवनी – महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर लगभग प्रत्येक नागरिक चिंतित है, महिलाओं के खिलाफ अन्याय, अत्याचार, उन पर जुल्म की प्रत्येक खबरें सामने आने के बाद महिला उत्पीड़न के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाने की मांग की जाती है । आजादी के बाद महिला उत्पीड़न संबंधित कानूनों में अनेक बदलाव किए गए एवं यह क्रम निरंतर आज भी जारी है । निश्चित ही कानूनों में कड़े प्रावधानों के चलते देश में महिलाओं पर अन्याय एवं अत्याचार में गिरावट देखी गई है । किंतु महिला उत्पीड़न बदस्तूर आज भी जारी है । महिला उत्पीड़न से संबंधित अधिकांश मामले ऐसे होते हैं जो सार्वजनिक नहीं होते तो कुछ मामलों में समाज की राक्षस एवं समाज के रक्षकों के बीच तालमेल होने के चलते दबा दिए जाते हैं पीड़िता की न्याय की गुहार को षड्यंत्र पूर्वक दवा दिया जाता है, कुचल दिया जाता है । तो वही ऐसे अनेक मामले भी सामने आते हैं जहां राजनीतिक द्वेष की भावना से ग्रसित होकर या अनेक वजहों से षड्यंत्र पूर्वक सिस्टम में व्याप्त कमियों का फायदा उठाकर किसी व्यक्ति को महिला उत्पीड़न से संबंधित झूठे गंभीर आरोपों में फंसा कर उसकी एवं उसके परिवार की जिंदगी तबाह, बर्बाद की जा रही है । ऐसे ही दर्दनाक एवं दुखद उदाहरण सिवनी जिले के केवलारी नगर से सामने आया है ,जहां पर दिनांक 16/07/ 2018 को केवलारी के प्रसिद्ध शासकीय शिक्षक, तत्कालीन आर एस एस के छिंदवाड़ा विभाग के बौद्धिक प्रमुख, प्रखर वक्ता, कुशल नेतृत्व के धनी, हिंदू धर्म ध्वजा के वाहक श्री बाल गोविंद पाठक जी पर कुछ कांग्रेसी नेताओं द्वारा षडयंत्र पूर्वक एक नाबालिक बच्ची से छेड़छाड़ करने का आरोप केवलारी थाने में दर्ज करवाया गया, इतना ही नहीं मामला दर्ज ना होता देख अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा धरना आंदोलन किया गया, चक्का जाम करने की धमकी दी गई । जिस पर एक्शन लेते हुए तत्कालीन केवलारी थाना प्रभारी प्रदीप बाल्मीकि ने उन धारा 354 एवं पोक्सो एक्ट में मामला पंजीबद्ध कर उन्हें जेल भेज दिया । इसके बाद जिला सत्र न्यायालय में लंबे समय केस चलने के बाद, कल उन्हें माननीय जिला सत्र न्यायालय सिवनी के न्यायाधीश महोदय द्वारा दोषमुक्त करार दे दिया गया है । आपको बता दें कि उक्त केस में श्री पाठक जी की ओर से सिवनी जिले के प्रसिद्ध अधिवक्ता विनोद राय जी पैरवी कर रहे थे । जिनकी काबिलियत एवं अथक प्रयासों से श्री पाठक जी एवं उनके परिवार को न्याय मिल पाया है ।

424 दिन जेल से नहीं हुई रिहाई

श्री पाठक जी बताते हैं कि थाना प्रभारी द्वारा अपनी विवेचना में ऐसे झूठे तथ्य प्रस्तुत किए गए थे कि माननीय उच्च न्यायालय से भी उन्हें जमानत नहीं दी गई और उन्हें निर्दोष होने के बावजूद 424 ( लगभग 14 माह से भी अधिक) दिन जेल में बिताना पड़ा इस समय अंतराल में उन्हें गहरी मानसिक पीड़ा उत्पन्न हुई , उनके मन में गहरा आघात पहुंचा, अपराधियों की तरह जेल में अपना जीवन यापन किया । साथ परिवार में बुजुर्ग मां-बाप एवं पत्नी बच्चे भी भारी मानसिक एवं समजिक प्रताड़ना से गुजरे इस षड्यंत्र एवं झूठे आरोप ने उनकी जिंदगी बदल दी उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो गई । उन्हें शासकीय नौकरी से अभी तक बेदखल रखा गया है । उनका कहना है यदि तत्कालीन थाना प्रभारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक ढंग से करते एवं निष्पक्ष विवेचना कर, लगाए गए झूठे आरोपों में तथ्यों की जांच कर लेते तो उन पर दुखों का पहाड़ नहीं टूटता । और ना ही उन्हें कैदियों की भांति जेल में इतने दिन बिताना पड़ता। आपको बता दें कि सिस्टम में बैठे भ्रष्ट एवं लालची लोगों की वजह से देश में ऐसे सैकड़ों केस प्रतिदिन दर्ज हो रहे हैं उनके परिवार तबाह हो रहे, बर्बाद हो रहे है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम में बदलाव अत्यंत आवश्यक है ।

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राजनीतिक षड्यंत्र के चलते लगाए गए थे 354, पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर झूठे आरोप !

 

प्रसिद्ध अधिवक्ता विनोद राय ने की थी पैरवी ।

सिवनी – महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर लगभग प्रत्येक नागरिक चिंतित है, महिलाओं के खिलाफ अन्याय, अत्याचार, उन पर जुल्म की प्रत्येक खबरें सामने आने के बाद महिला उत्पीड़न के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाने की मांग की जाती है । आजादी के बाद महिला उत्पीड़न संबंधित कानूनों में अनेक बदलाव किए गए एवं यह क्रम निरंतर आज भी जारी है । निश्चित ही कानूनों में कड़े प्रावधानों के चलते देश में महिलाओं पर अन्याय एवं अत्याचार में गिरावट देखी गई है । किंतु महिला उत्पीड़न बदस्तूर आज भी जारी है । महिला उत्पीड़न से संबंधित अधिकांश मामले ऐसे होते हैं जो सार्वजनिक नहीं होते तो कुछ मामलों में समाज की राक्षस एवं समाज के रक्षकों के बीच तालमेल होने के चलते दबा दिए जाते हैं पीड़िता की न्याय की गुहार को षड्यंत्र पूर्वक दवा दिया जाता है, कुचल दिया जाता है । तो वही ऐसे अनेक मामले भी सामने आते हैं जहां राजनीतिक द्वेष की भावना से ग्रसित होकर या अनेक वजहों से षड्यंत्र पूर्वक सिस्टम में व्याप्त कमियों का फायदा उठाकर किसी व्यक्ति को महिला उत्पीड़न से संबंधित झूठे गंभीर आरोपों में फंसा कर उसकी एवं उसके परिवार की जिंदगी तबाह, बर्बाद की जा रही है । ऐसे ही दर्दनाक एवं दुखद उदाहरण सिवनी जिले के केवलारी नगर से सामने आया है ,जहां पर दिनांक 16/07/ 2018 को केवलारी के प्रसिद्ध शासकीय शिक्षक, तत्कालीन आर एस एस के छिंदवाड़ा विभाग के बौद्धिक प्रमुख, प्रखर वक्ता, कुशल नेतृत्व के धनी, हिंदू धर्म ध्वजा के वाहक श्री बाल गोविंद पाठक जी पर कुछ कांग्रेसी नेताओं द्वारा षडयंत्र पूर्वक एक नाबालिक बच्ची से छेड़छाड़ करने का आरोप केवलारी थाने में दर्ज करवाया गया, इतना ही नहीं मामला दर्ज ना होता देख अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा धरना आंदोलन किया गया, चक्का जाम करने की धमकी दी गई । जिस पर एक्शन लेते हुए तत्कालीन केवलारी थाना प्रभारी प्रदीप बाल्मीकि ने उन धारा 354 एवं पोक्सो एक्ट में मामला पंजीबद्ध कर उन्हें जेल भेज दिया । इसके बाद जिला सत्र न्यायालय में लंबे समय केस चलने के बाद, कल उन्हें माननीय जिला सत्र न्यायालय सिवनी के न्यायाधीश महोदय द्वारा दोषमुक्त करार दे दिया गया है । आपको बता दें कि उक्त केस में श्री पाठक जी की ओर से सिवनी जिले के प्रसिद्ध अधिवक्ता विनोद राय जी पैरवी कर रहे थे । जिनकी काबिलियत एवं अथक प्रयासों से श्री पाठक जी एवं उनके परिवार को न्याय मिल पाया है ।

424 दिन जेल से नहीं हुई रिहाई

श्री पाठक जी बताते हैं कि थाना प्रभारी द्वारा अपनी विवेचना में ऐसे झूठे तथ्य प्रस्तुत किए गए थे कि माननीय उच्च न्यायालय से भी उन्हें जमानत नहीं दी गई और उन्हें निर्दोष होने के बावजूद 424 ( लगभग 14 माह से भी अधिक) दिन जेल में बिताना पड़ा इस समय अंतराल में उन्हें गहरी मानसिक पीड़ा उत्पन्न हुई , उनके मन में गहरा आघात पहुंचा, अपराधियों की तरह जेल में अपना जीवन यापन किया । साथ परिवार में बुजुर्ग मां-बाप एवं पत्नी बच्चे भी भारी मानसिक एवं समजिक प्रताड़ना से गुजरे इस षड्यंत्र एवं झूठे आरोप ने उनकी जिंदगी बदल दी उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो गई । उन्हें शासकीय नौकरी से अभी तक बेदखल रखा गया है । उनका कहना है यदि तत्कालीन थाना प्रभारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक ढंग से करते एवं निष्पक्ष विवेचना कर, लगाए गए झूठे आरोपों में तथ्यों की जांच कर लेते तो उन पर दुखों का पहाड़ नहीं टूटता । और ना ही उन्हें कैदियों की भांति जेल में इतने दिन बिताना पड़ता। आपको बता दें कि सिस्टम में बैठे भ्रष्ट एवं लालची लोगों की वजह से देश में ऐसे सैकड़ों केस प्रतिदिन दर्ज हो रहे हैं उनके परिवार तबाह हो रहे, बर्बाद हो रहे है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम में बदलाव अत्यंत आवश्यक है ।

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