ग्राम पंचायत सलेमा मे राजस्व अमला टीम ने किया आबादी भूमि का ड्रोन सर्वे

स्वामित्व योजना के अंतर्गत राजस्व गांव की आबादी भूमि का ड्रोन कैमरे से हवाई सर्वे हुआ शुरू, लोगों में बना कौतूहल 

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संवाददाता नरेंद्र सिंह कुमरे

धनोरा। जनपद पंचायत धनोरा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सलेमा मे राजस्व अमला टीम ने किया आबादी का ड्रोन सर्वे धनोरा तहसील के अनेक पटवारी रहे उपस्थित ग्राम कोटवार मुन्ना लाल कुमरे समेत पटवारियों के द्वारा पूरे सलेमा गांव में भ्रमण करके सर्वे किया गया जिसमें ग्राम पंचायत सचिव एवं सलेमा सरपंच तेजी लाल कुमरे, पंचायत मेट किशनलाल बकोड़े एवं ग्रामवासी उपस्थित रहें ।

आपको बता दे की भारत सरकार ने ग्रामीण आबादी सर्वे के लिए स्वामित्व योजना शुरू की है। इसी योजना के तहत जिले की ग्रामीण आबादी का जीआईएस आधारित सर्वेक्षण और भू-मापन काम अगले एक महीने में पूरा किया जाना है। उन्होंने बताया ग्रामीण आबादी का सर्वेक्षण करके अधिकार अभिलेख तैयार किए जाएंगे। भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा ड्रोन के माध्यम से ग्रामीण आबादी स्थल की इमेजनरी जानकारी एकत्रित की जाएगी। इसके बाद आबादी भूमि का डिजिटल प्रारूप नक्शा तैयार किया जाएगा। प्रारूप नक्शे भूखण्ड डेटा के साथ पहले से उपलब्ध पूरे डेटा का उपयोग कर अभिलेख अधिकार तैयार किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर स्थित विभिन्न विभागों, गृह स्वामियों और संपत्ति धारकों की संपत्तियों का चिन्हांकन चूना मार्किंग या चूने के घोल से किया जाएगा। संपत्ति चिन्हांकन का काम तहसीलदार द्वारा गठित राजस्व अमले के दल द्वारा किया जाएगा। चिन्हांकन के बाद इलाके में ड्रोन उड़ाकर इमेजनरी डाटा एकत्रित किया जाएगा और इस डाटा से आगे अधिकार अभिलेख तैयार होंगे।

ड्रोन सर्वेक्षण से जिनके पास दस्तावेज नहीं उन्हें मिलेगा फायदा 

गांवों में सैकड़ों परिवार ऐसे हैं, जिनका आबादी भूमि पर कई वर्षों से स्वामित्व तो है, लेकिन उनके पास भूखंड से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। लेकिन अब सर्वे के बाद खाली भूखंड एवं भवन निर्माण की जानकारी राजस्व रिकॉर्ड में नंबरिंग सहित मानचित्र पर दर्ज की जाएगी। जिससे भूमि मालिकों को भूखंड़ों का रिकॉर्ड में स्वामित्व मिल जाएगा।

ग्रामीण संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार हो जाने से ग्राम पंचायतों को स्थायी आय की व्यवस्था में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही ग्राम विकास योजनाएं बनाने में भी सुविधा होगी। ग्राम पंचायतों की संपत्ति, शासकीय और सार्वजनिक संपत्ति की सीमा तथा क्षेत्रफल निश्चित हो जाने से उनका रख-रखाव बेहतर ढंग से किया जा सकेगा और समय-समय पर होने वाले सीमा विवाद भी निपटेंगे। ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण से ग्रामवासियों को भी बहुत लाभ होगा। सभी संपत्ति धारकों को प्रमाण पत्र एवं भूमि स्वामित्व प्राप्त होगा। सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों का संरक्षण होगा। ग्राम पंचायतों में खुली जगह, रास्ते, नाले, तालाब, सरोवर आदि की सीमाएं निश्चित होगी जिससे उनका समुचित उपयोग हो सकेगा। संपत्ति का अभिलेख मिल जाने से ग्रामीणों को मकान बनाने के लिए बैंक से ऋण के साथ-साथ अन्य शासकीय योजनाओं का भी लाभ मिलने लगेगा।

 

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स्वामित्व योजना के अंतर्गत राजस्व गांव की आबादी भूमि का ड्रोन कैमरे से हवाई सर्वे हुआ शुरू, लोगों में बना कौतूहल 

संवाददाता नरेंद्र सिंह कुमरे

धनोरा। जनपद पंचायत धनोरा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सलेमा मे राजस्व अमला टीम ने किया आबादी का ड्रोन सर्वे धनोरा तहसील के अनेक पटवारी रहे उपस्थित ग्राम कोटवार मुन्ना लाल कुमरे समेत पटवारियों के द्वारा पूरे सलेमा गांव में भ्रमण करके सर्वे किया गया जिसमें ग्राम पंचायत सचिव एवं सलेमा सरपंच तेजी लाल कुमरे, पंचायत मेट किशनलाल बकोड़े एवं ग्रामवासी उपस्थित रहें ।

आपको बता दे की भारत सरकार ने ग्रामीण आबादी सर्वे के लिए स्वामित्व योजना शुरू की है। इसी योजना के तहत जिले की ग्रामीण आबादी का जीआईएस आधारित सर्वेक्षण और भू-मापन काम अगले एक महीने में पूरा किया जाना है। उन्होंने बताया ग्रामीण आबादी का सर्वेक्षण करके अधिकार अभिलेख तैयार किए जाएंगे। भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा ड्रोन के माध्यम से ग्रामीण आबादी स्थल की इमेजनरी जानकारी एकत्रित की जाएगी। इसके बाद आबादी भूमि का डिजिटल प्रारूप नक्शा तैयार किया जाएगा। प्रारूप नक्शे भूखण्ड डेटा के साथ पहले से उपलब्ध पूरे डेटा का उपयोग कर अभिलेख अधिकार तैयार किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर स्थित विभिन्न विभागों, गृह स्वामियों और संपत्ति धारकों की संपत्तियों का चिन्हांकन चूना मार्किंग या चूने के घोल से किया जाएगा। संपत्ति चिन्हांकन का काम तहसीलदार द्वारा गठित राजस्व अमले के दल द्वारा किया जाएगा। चिन्हांकन के बाद इलाके में ड्रोन उड़ाकर इमेजनरी डाटा एकत्रित किया जाएगा और इस डाटा से आगे अधिकार अभिलेख तैयार होंगे।

ड्रोन सर्वेक्षण से जिनके पास दस्तावेज नहीं उन्हें मिलेगा फायदा 

गांवों में सैकड़ों परिवार ऐसे हैं, जिनका आबादी भूमि पर कई वर्षों से स्वामित्व तो है, लेकिन उनके पास भूखंड से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं है। लेकिन अब सर्वे के बाद खाली भूखंड एवं भवन निर्माण की जानकारी राजस्व रिकॉर्ड में नंबरिंग सहित मानचित्र पर दर्ज की जाएगी। जिससे भूमि मालिकों को भूखंड़ों का रिकॉर्ड में स्वामित्व मिल जाएगा।

ग्रामीण संपत्ति का रिकॉर्ड तैयार हो जाने से ग्राम पंचायतों को स्थायी आय की व्यवस्था में सहायता मिलेगी। इसके साथ ही ग्राम विकास योजनाएं बनाने में भी सुविधा होगी। ग्राम पंचायतों की संपत्ति, शासकीय और सार्वजनिक संपत्ति की सीमा तथा क्षेत्रफल निश्चित हो जाने से उनका रख-रखाव बेहतर ढंग से किया जा सकेगा और समय-समय पर होने वाले सीमा विवाद भी निपटेंगे। ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण से ग्रामवासियों को भी बहुत लाभ होगा। सभी संपत्ति धारकों को प्रमाण पत्र एवं भूमि स्वामित्व प्राप्त होगा। सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों का संरक्षण होगा। ग्राम पंचायतों में खुली जगह, रास्ते, नाले, तालाब, सरोवर आदि की सीमाएं निश्चित होगी जिससे उनका समुचित उपयोग हो सकेगा। संपत्ति का अभिलेख मिल जाने से ग्रामीणों को मकान बनाने के लिए बैंक से ऋण के साथ-साथ अन्य शासकीय योजनाओं का भी लाभ मिलने लगेगा।

 

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