आशा कार्यकर्ताओं का धरना प्रदर्शन : अमानवीय शोषण के खिलाफ, वेतन वृद्धि के लिये आशाओं का एक सप्ताह का प्रदेशव्यापी हडताल शुरू

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सिवनी। जिला मुख्यालय में अम्बेडकर चौक में आशा ऊषा पर्यवेक्षकों अपनी प्रमुख मांगो को लेकर आज तीसरे दिन भीं धरने में बैठी। इस दौरान दुर्गेशनंदनी,सीता, किरण, सरस्वती चंदेल, संतोषी श्रीवास, सबीना परवीन,संगीता सनोडिया, ओम बघेल,खेमेस्वरी गोस्वामी,दयावंती उईके, सीमा बघेल,कनिज़ा बानो,केशवती उइके, अर्चना बनबाले, पुष्पकला गौतम,अभिलाषा मटेले, सरोज यादव,चंद्रकांता जंघेला,मोहिनी ठाकुर, रुकमणी सनोडिया, उर्मिला,संतोषी बंसकार, रेखा यादव,माया सनोडिया,गीता गौतम, राजकुमारी डहेरिया,नीलमणि बघेल,नेहा चंद्रवंसी, कृश्णा शेंडे,वंदना उपध्याय, सावित्री विश्वकर्मा, ज्ञानवती चंदेल,अहिल्या गज्जाम,राजकुमारी बघेल, मोहिनी सनोडिया,गायत्री डहेरिया, शर्मिला माली,सरस्वती सनोडिया, सहसमनी डहेरिया,सरिता भलावी,शारदा तुमदाम, ममता,रुक्मडी कटरे, रविता बघेल, शारदा मर्सकोले, सुमित्रा पंचेस्वर,ममता डोंगरे,प्रमिला धुर्वे,रामधारा डहेरिया, श्यामवती मसराम,मुक्ता उईके,विमला इनवाती,ने सभा को सम्बोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि मध्य प्रदेश में आशा ऊषा एवं पर्यवेक्षकों पर काम का बोझ एवं शोषण तेजी से बढ रही है जबकि वेतन लगातार घट रही है। इसका तीव्र विरोध करते हुये सभी ने इसके खिलाफ आंदोलन को तेज करने एवं राज्य सरकार की ओर से सम्मानजनक वेतन वृद्धि होने तक संघर्ष जारी रखने की अपील की।

वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन नियुक्त आशा एवं पर्यवेक्षक आज स्वास्थ्य विभाग में प्रमुख मैदानी कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही है। पूरे देश मेें मातृ एवं शिशु मृत्यु को रोकने के विभाग के अभियानों को कठिन परिस्थितियों में संचालित करने, ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराने, महामारी से निबटने में आशाओं की भूमिका आदि आशाओं के काम के महत्व को मान्यता देते हुये विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देश एवं प्रदेश की आशाओं को ग्लोबल हेल्थ लीडर की उपाधि देते हुये 6 अंतर्राष्ट्रीय अवार्डों से नवाजा है। यह अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जो आशाओं की मेहनत के चलते देश को प्राप्त हुयी है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि मध्य प्रदेश की अधिकांश आशायें अभी भी मात्र 2000 रुपये के अल्प वेतन में गुजारा करने के लिये विवश है, यह राशि भी केन्द्र सरकार द्वारा देय है। आन्ध्र प्रदेश सरकार अपनी ओर से 8,000 मिलाकर आशा को 10,000 रुपये का मानदेय देते है, तेलंगाना में राज्य सरकार 7,500 रुपये मिलाकर 9,500 रुपये देते है।

इसी तरह केरल, महाराष्ट्रा, हरियाणा सहित सभी राज्य सरकारें आशा एवं पर्यवेक्षकों को अपनी ओर से अतिरिक्त मानदेय दे रही है,लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने आशा एवं पर्यवेक्षक को अपनी ओर से विगत 15 वर्षों से कुछ भी नही दिया।

आशाओं में से सहयोगी बनाकर प्रशिक्षण देकर आशाओं के काम का पर्यवेक्षण करने वाला आशा सहयोगियों को 2021 में पर्यवेक्षक का पद नाम दिया गया। लेकिन पर्यवेक्षकों का यात्रा भत्ता अलग किया जाय तो यह वेतन सरकार के न्यूनतम वेतन में अकुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन की दर से भी कम है। यह न तो व्यावहारिक है और न ही तर्कसंगत है। लगातार बढ रही महंगाई के चलते आशा एवं पर्यवेक्षकों को मिल रहे वेतन का असली मूल्य लगातार घट रहा है और साथ ही जीवन के स्तर में भी गिरावट जारी है। इसके बाद भी सरकार आशा एवं पर्यवेक्षकों के वेतन वृद्धि की मांग को नजरअंदाज करें तो यह प्रदेश की आशा एवं पर्यवेक्षकों के लिये अत्यंत गम्भीर चिंता का विषय है।

इस परिस्थितियों में आशा ऊषा आशा सहयोगी संयुक्त मोर्चा आह्वान पर आज 14 से 19 नवम्बर 2022 तक प्रदेश व्यापी हडताल करने का निर्णय लिया है। हडताल की मांगों में मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्य प्रदेश द्वारा 24 जून 2021 को दिये निर्णय को लागू कर आशा को 10,000 रु एवं पर्यवेक्षकों को 15,000 रुपये निश्चित वेतन देने, उसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोडऩे, आशा, ऊषा, आशा पर्यवेक्षकों को कर्मचारी के रूप मेंं नियमित करने, तब तक न्यूनतम वेतन, भविष्य निधि, ई.एस. आई.,ग्रेच्युटी, पेंशन सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ देने, न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये करने, प्रोत्साहन राशि पूरा भुगतान करने, इसमें अनुचित कटौती को रोकने, सभी बकाया राशियों का एरियर सहित भुगतान करने,प्रत्येक माह की 5 तारीख को आशा एवं पर्यवेक्षकों का भुगतान करने, आशाओं के लिये निर्धारित कार्य के अलावा अन्य कार्य कराने पर रोक लगाने, वेतन सहित वर्ष में 20 कैजुअल अवकाश एवं मेडिकल लीव देने, न्यूनतम वेतन की दर पर 6 माह का मातृत्व अवकाश एवं अन्य सुविधायें देने, बिना किसी जांच के आशाओं की सेवा समाप्ति पर तुरंत रोक लगाने,सभी पीएचसी, सीएचसी और अस्पतालों में सुरक्षित एवं सुविधायुक्त ‘आशा रूमÓ उपलब्ध कराने, पीओएसएच कानून लागू करो और शिकायतों पर कार्यवाही करने, स्वास्थ्य सेवाओं (सरकारी अस्पतालों ) सहित सभी बुनियादी सेवाओं के निजीकरण को रोकने, श्रम संहिताओं को वापस लेने एवं आशा एवं र्पवेक्षकों को श्रम कानूनों के दायरे में शामिल किये जोने की मांग प्रमुख है।

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सिवनी। जिला मुख्यालय में अम्बेडकर चौक में आशा ऊषा पर्यवेक्षकों अपनी प्रमुख मांगो को लेकर आज तीसरे दिन भीं धरने में बैठी। इस दौरान दुर्गेशनंदनी,सीता, किरण, सरस्वती चंदेल, संतोषी श्रीवास, सबीना परवीन,संगीता सनोडिया, ओम बघेल,खेमेस्वरी गोस्वामी,दयावंती उईके, सीमा बघेल,कनिज़ा बानो,केशवती उइके, अर्चना बनबाले, पुष्पकला गौतम,अभिलाषा मटेले, सरोज यादव,चंद्रकांता जंघेला,मोहिनी ठाकुर, रुकमणी सनोडिया, उर्मिला,संतोषी बंसकार, रेखा यादव,माया सनोडिया,गीता गौतम, राजकुमारी डहेरिया,नीलमणि बघेल,नेहा चंद्रवंसी, कृश्णा शेंडे,वंदना उपध्याय, सावित्री विश्वकर्मा, ज्ञानवती चंदेल,अहिल्या गज्जाम,राजकुमारी बघेल, मोहिनी सनोडिया,गायत्री डहेरिया, शर्मिला माली,सरस्वती सनोडिया, सहसमनी डहेरिया,सरिता भलावी,शारदा तुमदाम, ममता,रुक्मडी कटरे, रविता बघेल, शारदा मर्सकोले, सुमित्रा पंचेस्वर,ममता डोंगरे,प्रमिला धुर्वे,रामधारा डहेरिया, श्यामवती मसराम,मुक्ता उईके,विमला इनवाती,ने सभा को सम्बोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि मध्य प्रदेश में आशा ऊषा एवं पर्यवेक्षकों पर काम का बोझ एवं शोषण तेजी से बढ रही है जबकि वेतन लगातार घट रही है। इसका तीव्र विरोध करते हुये सभी ने इसके खिलाफ आंदोलन को तेज करने एवं राज्य सरकार की ओर से सम्मानजनक वेतन वृद्धि होने तक संघर्ष जारी रखने की अपील की।

वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन नियुक्त आशा एवं पर्यवेक्षक आज स्वास्थ्य विभाग में प्रमुख मैदानी कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही है। पूरे देश मेें मातृ एवं शिशु मृत्यु को रोकने के विभाग के अभियानों को कठिन परिस्थितियों में संचालित करने, ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध कराने, महामारी से निबटने में आशाओं की भूमिका आदि आशाओं के काम के महत्व को मान्यता देते हुये विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देश एवं प्रदेश की आशाओं को ग्लोबल हेल्थ लीडर की उपाधि देते हुये 6 अंतर्राष्ट्रीय अवार्डों से नवाजा है। यह अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जो आशाओं की मेहनत के चलते देश को प्राप्त हुयी है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि मध्य प्रदेश की अधिकांश आशायें अभी भी मात्र 2000 रुपये के अल्प वेतन में गुजारा करने के लिये विवश है, यह राशि भी केन्द्र सरकार द्वारा देय है। आन्ध्र प्रदेश सरकार अपनी ओर से 8,000 मिलाकर आशा को 10,000 रुपये का मानदेय देते है, तेलंगाना में राज्य सरकार 7,500 रुपये मिलाकर 9,500 रुपये देते है।

इसी तरह केरल, महाराष्ट्रा, हरियाणा सहित सभी राज्य सरकारें आशा एवं पर्यवेक्षकों को अपनी ओर से अतिरिक्त मानदेय दे रही है,लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने आशा एवं पर्यवेक्षक को अपनी ओर से विगत 15 वर्षों से कुछ भी नही दिया।

आशाओं में से सहयोगी बनाकर प्रशिक्षण देकर आशाओं के काम का पर्यवेक्षण करने वाला आशा सहयोगियों को 2021 में पर्यवेक्षक का पद नाम दिया गया। लेकिन पर्यवेक्षकों का यात्रा भत्ता अलग किया जाय तो यह वेतन सरकार के न्यूनतम वेतन में अकुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन की दर से भी कम है। यह न तो व्यावहारिक है और न ही तर्कसंगत है। लगातार बढ रही महंगाई के चलते आशा एवं पर्यवेक्षकों को मिल रहे वेतन का असली मूल्य लगातार घट रहा है और साथ ही जीवन के स्तर में भी गिरावट जारी है। इसके बाद भी सरकार आशा एवं पर्यवेक्षकों के वेतन वृद्धि की मांग को नजरअंदाज करें तो यह प्रदेश की आशा एवं पर्यवेक्षकों के लिये अत्यंत गम्भीर चिंता का विषय है।

इस परिस्थितियों में आशा ऊषा आशा सहयोगी संयुक्त मोर्चा आह्वान पर आज 14 से 19 नवम्बर 2022 तक प्रदेश व्यापी हडताल करने का निर्णय लिया है। हडताल की मांगों में मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्य प्रदेश द्वारा 24 जून 2021 को दिये निर्णय को लागू कर आशा को 10,000 रु एवं पर्यवेक्षकों को 15,000 रुपये निश्चित वेतन देने, उसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जोडऩे, आशा, ऊषा, आशा पर्यवेक्षकों को कर्मचारी के रूप मेंं नियमित करने, तब तक न्यूनतम वेतन, भविष्य निधि, ई.एस. आई.,ग्रेच्युटी, पेंशन सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ देने, न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये करने, प्रोत्साहन राशि पूरा भुगतान करने, इसमें अनुचित कटौती को रोकने, सभी बकाया राशियों का एरियर सहित भुगतान करने,प्रत्येक माह की 5 तारीख को आशा एवं पर्यवेक्षकों का भुगतान करने, आशाओं के लिये निर्धारित कार्य के अलावा अन्य कार्य कराने पर रोक लगाने, वेतन सहित वर्ष में 20 कैजुअल अवकाश एवं मेडिकल लीव देने, न्यूनतम वेतन की दर पर 6 माह का मातृत्व अवकाश एवं अन्य सुविधायें देने, बिना किसी जांच के आशाओं की सेवा समाप्ति पर तुरंत रोक लगाने,सभी पीएचसी, सीएचसी और अस्पतालों में सुरक्षित एवं सुविधायुक्त ‘आशा रूमÓ उपलब्ध कराने, पीओएसएच कानून लागू करो और शिकायतों पर कार्यवाही करने, स्वास्थ्य सेवाओं (सरकारी अस्पतालों ) सहित सभी बुनियादी सेवाओं के निजीकरण को रोकने, श्रम संहिताओं को वापस लेने एवं आशा एवं र्पवेक्षकों को श्रम कानूनों के दायरे में शामिल किये जोने की मांग प्रमुख है।

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