जो शिव भक्त की सेवा करते हैं उन्हें मिलता है शिवलोक : हितेंद्र शास्त्री सिवनी/केवलारी

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केवलारी – धर्म की नगरी केवलारी में तिवारी परिवार उगली नाका में आयोजित श्री शिव महापुराण में पुराण के पंचम दिवस शनिवार को प्रवक्ता श्री हितेंद्र पांडेय जी ने भगवान शिव की कथा के दौरान कहा कि जो शिव की पूजा में लगे रहते हैं, ऐसे भक्तों की जो सेवा करता है उसे साक्षात शिवलोक प्राप्त होता है।

उन्होंने आगे कहा कि हम अपने धर्म में चलते हैं तो सद्गति हो जाती है। सत्संग करना चाहिए पर सत्संग कराने वाला व्यक्ति कौन है किस प्रकार का है। उसके गुण-दोष यह भी जानना जरूरी है। इसलिए कहा गया है पानी पिए छान के गुरु मनाए जान के। बिना गुरु के भी नहीं रहना चाहिए लेकिन गुरु बनाते समय उनके विषय में जाने फिर उनसे गुरु दीक्षा ले।

शिव की पूजा का विधान बताते हुए आगे कहा कि विधवाओं को छोटे स्फटिक शिवलिंग की पूजा जरूर करनी चाहिए। इसके साथ ही ऐसी विधवा महिलाएं जो विरक्त हैं। घर परिवार में नहीं रहती में नहीं हैं उन्हें पत्थर के शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही वृद्ध महिलाओं और ग्रस्त महिलाओं को स्फटिक शिव की पूजा उचित बतलाइए गई है। वही लोहे, धातु, लकड़ी आदि के बने शिवलिंग की पूजा अलग-अलग वर्णों के लिए बताया गया है।

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केवलारी – धर्म की नगरी केवलारी में तिवारी परिवार उगली नाका में आयोजित श्री शिव महापुराण में पुराण के पंचम दिवस शनिवार को प्रवक्ता श्री हितेंद्र पांडेय जी ने भगवान शिव की कथा के दौरान कहा कि जो शिव की पूजा में लगे रहते हैं, ऐसे भक्तों की जो सेवा करता है उसे साक्षात शिवलोक प्राप्त होता है।

उन्होंने आगे कहा कि हम अपने धर्म में चलते हैं तो सद्गति हो जाती है। सत्संग करना चाहिए पर सत्संग कराने वाला व्यक्ति कौन है किस प्रकार का है। उसके गुण-दोष यह भी जानना जरूरी है। इसलिए कहा गया है पानी पिए छान के गुरु मनाए जान के। बिना गुरु के भी नहीं रहना चाहिए लेकिन गुरु बनाते समय उनके विषय में जाने फिर उनसे गुरु दीक्षा ले।

शिव की पूजा का विधान बताते हुए आगे कहा कि विधवाओं को छोटे स्फटिक शिवलिंग की पूजा जरूर करनी चाहिए। इसके साथ ही ऐसी विधवा महिलाएं जो विरक्त हैं। घर परिवार में नहीं रहती में नहीं हैं उन्हें पत्थर के शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही वृद्ध महिलाओं और ग्रस्त महिलाओं को स्फटिक शिव की पूजा उचित बतलाइए गई है। वही लोहे, धातु, लकड़ी आदि के बने शिवलिंग की पूजा अलग-अलग वर्णों के लिए बताया गया है।

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