राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने दिए महिला बाल विकास के पर्यवेक्षकों पर कार्यवाही के निर्देश

अब गिर सकती है गाज केवलारी की पर्यवेक्षकों पर

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने दिए महिला बाल विकास के पर्यवेक्षकों पर कार्यवाही के निर्देश

केवलारी। भारत सरकार राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के अंतर्गत उसे प्रदत्त शक्तियों का अनुशरण करते हुये महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय मध्यप्रदेश के सचिव को महिला एवं बाल विकास विभाग केवलारी में पदस्थ पर्यवेक्षकों के विरूद्ध कार्यवाही करने के सख्त निर्देश दिए हैं,,,मामला यह है कि खैरापलारी, तहसील केवलारी निवासी समाजसेवी देवराज डेहरिया द्वारा महिला एवं बाल विकास केवलारी में कुछ विभागीय जानकारी जैसे कि पर्यवेक्षकों के मुख्यालय में निवासरत, पर्यवेक्षकों की अग्रिम एवम् वास्तविक दौरा डायरी एवं पोषण आहार सम्बन्धी आदि जन कल्याणकारी योजना से सरोकार रखने वाली जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई थी, जिसकी जानकारी पर्यवेक्षकों के द्वारा न दी जाकर उल्टे ही आरटीआई के आवेदक श्री डेहरिया के निवास ग्राम में स्थित आंगनवाड़ी केन्द्र की कार्यकर्ता को एक साथ चार पर्यवेक्षक किरण सोलंकी, पूनम तिवारी, रचना कुल्हाड़े एवं शोभा धुर्वे द्वारा भय दिखाकर कहा गया कि देवराज डेहरिया तुम्हारे ग्राम का निवासी है, तुम उससे बोलकर आरटीआई का आवेदन वापिस करवाओ वरना हम तुम्हारी नौकरी खा जाएंगे उक्त घटना का उपस्थित नागरिकों के द्वारा विरोध करते हुये पंचनामा भी बनाया गया था, एवं उक्त बात की शिकायत जिला कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मी धुर्वे से भी की गई थी किन्तु स्वयं लक्ष्मी धुर्वे अपने कार्यालय से पत्र जारी कर आवेदक देवराज डेहरिया को लिखतीं हैं कि पर्यवेक्षकों के द्वारा जानकारी नहीं देने से आवेदक को जानकारी नहीं दी सकी, वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मी धुर्वे द्वारा पर्यवेक्षकों की लापरवाही का लिखित में वर्णन तो किया जा रहा किन्तु आश्चर्य की बात यह है कि आखिर जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा आज तक उक्त लापरवाह पर्यवेक्षकों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई है, बल्कि उल्टा इन पर्यवेक्षकों को संरक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे महिला बाल विकास केवलारी में पर्यवेक्षकों की निरंकुशता दिनों दिन बढ़ती जा रही है, जिससे स्पष्ट होता है कि उक्त पर्यवेक्षकों और जिला कार्यक्रम अधिकारी की गहरी सांठ-गांठ है जब तो ऐसे गंभीर मामले में उक्त पर्यवेक्षकों पर कोई कार्यवाही न करना और उन्हे संरक्षण प्रदान करना संदेहास्पद प्रतीत होता है।
सोचनीय विषय यह है कि महिला एवं बाल विकास केवलारी में पदस्थ पर्यवेक्षकों द्वारा निरंतर अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाही मनमानी इत्यादि की सूचना एवं शिकायत क्षेत्रीयजनों द्वारा आयेदिन की जा रही है साथ ही समाचार पत्रों में भी प्रकाशन किया जा रहा है, और इनकी कार्यप्रणाली को उजागर किया जा रहा है, किन्तु जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा उक्त पर्यवेक्षकों पर कार्यवाही न करना संदेहरहित स्पष्ट होता है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह उठना लाजिमी हैं एवं उक्त घटनाक्रम जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं पर्यवेक्षकों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
गौरतलब है कि जब जिला कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मी धुर्वे द्वारा आवेदक देवराज डहेरिया के निवेदन पर उक्त लापरवाह पर्यवेक्षकों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई तब निराश होकर देवराज डेहरिया को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की शरण में जाना पड़ा, और देवराज डहेरिया की शिकायत को आयोग द्वारा गंभीरता से संज्ञान में लेकर सचिव महिला बाल विकास विभाग मंत्रालय को उक्त लापरवाह पर्यवेक्षकों के विरूद्ध कार्यवाही करने हेतु पत्र लिखा गया,,,अब देखना यह है कि उक्त प्रकाशित खबर को पढ़ने के बाद भी क्या जिला कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मी धुर्वे उक्त लापरवाह पर्यवेक्षकों के विरूद्ध क्या कार्यवाही करते है? या इन्हे कार्यवाही से बचाते हैं?

 

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