भूतलक्षी प्रभाव से शिक्षा को विश्रामावकाश विभाग से हटाया जावे

भोपाल। मप्र शासन ने स्कूल शिक्षा विभाग को विश्रामावकाश विभाग में शामिल किया हुआ है। मप्र तृतीय वर्ग शास कर्म संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने बताया कि अन्य विभागों के मुकाबले शिक्षकों को अवकाश कम मिलते है। शिक्षा विभाग, विश्रामावकाश विभाग में शामिल होने से ग्रीष्म, दशहरा, दीपावली व शीतकालीन अवकाश दिये जाते है। उक्त अवकाश की अन्य विभागों से तथ्यात्मक तुलना करने पर शिक्षकों के अवकाश अन्य कर्मचारियों के मुकाबले कम ही मिलते है। शिक्षा विभाग मुफ्त में अवकाश के लिए बदनाम है।

बानगी देखिए शिक्षकों के लिए ग्रीष्मावकाश 01 मई से 09 जून कुल 40 दिन में से 05 रविवार कम करने पर 35 दिन। दशहरा अवकाश 04 दिन में से 01 दिन सामान्य अवकाश निकालने पर 03 दिन। दीपावली अवकाश 06 दिन में से 02 दिन एक सामान्य व एक रविवार अवकाश निकालने पर 04 दिन व शीतकालीन अवकाश 07 दिन में से 02 दिन सामान्य व रविवार अवकाश निकालने पर 05 दिन अवकाश मिलता है। शिक्षकों के कुल आवकाश की गणना करें तो 35+03+04+02 कुल 44 दिन अवकाश प्रतिवर्ष मिलते है। अब अन्य विभागों को देखे तो द्वितीय व तृतीय शनिवार कुल 24 दिन व वर्ष भर के 30 अर्जित अवकाश कुल 54 दिन अवकाश मिलते है; जो शिक्षकों के मुकाबले 10 दिन अधिक है।

अन्य विभागों के कर्मचारियों के लिए प्रति छः माह जनवरी से जून व जुलाई से दिसंबर की अवधि के लिए 15; 15 कुल 30 दिन अर्जित अवकाश स्वीकृत कर इनकी सेवापुस्तिका में प्रविष्टी करने प्रावधान है। सेवानिवृत्ति पर 300 दिन नगदीकरण करवाने का आदेश है। इसमें से अतिरिक्त जमा अवकाश अपनी सुविधानुसार 21 दिन पूर्व आवेदन देकर आकस्मिक अवकाश के समान ले सकते है। शिक्षकों को अन्य कर्मचारियों के मुकाबले 10 दिन अवकाश कम दिये जाते है। इसके अलावा अवकाश अवधि में शिक्षकों को कर्तव्यारूढ़ होने पर तीन दिन अवकाश अवधि में काम करने पर एक दिन अर्जित अवकाश के प्रावधान है। अवकाश अवधि में कर्तव्यारूढ़ शिक्षकों को अर्जित अवकाश पात्रता घोषित करवाने के लिए घाट-घाट का पानी पीना पड़ता है।

वर्ष 2008 से अवकाश अवधि में शिक्षकों को कर्तव्यारूढ़ करने के एवज में 15 दिवस के अवकाश डीएम व अधिक के लिए आयुक्त लोकशिक्षण संचालनालय मप्र भोपाल को अधिकृत किया गया है। उक्त केंद्रीकृत व्यवस्था से शिक्षकों को विश्रामावकाश में कर्तव्यारूढ़ करने पर भी अर्जित अवकाश पात्रता घोषित करने के लिए उक्त अधिकारियों का उदासीन रवैया रहा है। तत्थ्यात्मक समीक्षा की जाए तो चौंकाने वाला खुलासा होगा; इन अधिकारियों ने नगण्य शिक्षकों के लिए अर्जित अवकाश पात्रता स्वीकृत की है। कई पात्र शिक्षक विश्रामावकाश में कर्तव्यारूढ़ करने पर भी अर्जित अवकाश पात्रता घोषित करवाने की मैराथन दौड़ में हताश व निराश हो चुके है।

वर्ष 1990 के पूर्व ग्रीष्म 01मई से 30 जून 61 दिन, दशहरा-दीपावली 24 व शीतकालीन अवकाश 07 कुल 92 दिन अवकाश मिलते थे। अवकाश कटौती के एवज में 10 दिन प्रतिवर्ष सभी शिक्षकों को अर्जित अवकाश दिये जाने लगे थे। विडम्बना देखिये वर्ष 2008 में ऐसे अवकाश को भूतलक्षी प्रभाव से समाप्त किया जा चुका है। मप्र तृतीय वर्ग शास कर्म संघ शासन-प्रशासन से मांग करता है कि शिक्षा विभाग को विश्रामावकाश विभाग से हटाकर अन्य कर्मचारियों के साथ व समान अवकाश व अर्जित अवकाश स्वीकृत किये जावे। शिक्षकों के अवकाश कटौती वर्ष 1990 से प्रतिवर्ष अन्य कर्मचारियों के समान 30 दिन प्रतिवर्ष अर्जित अवकाश स्वीकृत कर इनके सेवाअभिलेख में प्रविष्टी की जावे। सेवानिवृत्ति पर भी नगदीकरण व्यवस्था अन्य कर्मचारियों के समान होना चाहिए।

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