मध्यप्रदेश में सुप्रीम कोर्ट ने बागी कांग्रेस विधायको को मंत्री पद से हटाने की याचिका की खारिज

मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक ने शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली भाजपा सरकार में मंत्री पद जारी रखने के लिए 12 कांग्रेस विधायक जो भाजपा में शामिल हुए, उनको को प्रतिबंधित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिसे बुधवार को कोर्ट ने खारिज कर दिया। हाल ही में 28 सीटों पर हुए उपचुनाव के बाद इन विधायकों को भाजपा के टिकट पर नए सिरे से चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई।
सीजेआई एसए बोबडे की अगुवाई वाली तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने जबलपुर (उत्तर) निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के एक विधायक विनय सक्सेना द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका मार्च में दायर की गई थी, जब कांग्रेस के 22 बागी विधायकों (विचाराधीन 12 विधायकों सहित) के खिलाफ अयोग्यता याचिका मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष के पास लंबित थी।
सक्सेना की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत को सूचित किया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मार्च में याचिका दायर होने के बावजूद सुनवाई में देरी होने की वजह से इसे खारिज कर दिया। कपिल सिब्बल ने कहा, “जिन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए था, उनकी अयोग्यता के खिलाफ अदालतों में मामले सुधरने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है।” सुप्रीम कोर्ट में इसी तरह की दलीलों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा ये अकेला मामला नहीं था। गोवा, तमिलनाडु और कर्नाटक में दोषपूर्ण विधायकों के खिलाफ भी ऐसा ही देखा गया।
यह भी पढ़ें- मध्य प्रदेश उपचुनाव: 28 विधानसभा सीटों पर 69.93 प्रतिशत मतदान हुआ
मार्च में राज्य में कमलनाथ सरकार के पतन के कारण भाजपा में शामिल होने के लिए जाने वाले बीसियों विधायकों ने भाग लिया था। सीजेआई बोबड़े ने सिब्बल की ओर इशारा करते हुए टिप्पणी की, “दोनों पक्षों द्वारा समय की मांग की जाती है। यहां तक ​​कि आप स्थगन के लिए भी पूछते हैं।” राज्य की 28 खाली सीटों पर 3 नवंबर को उपचुनाव हुए, जिसके नतीजे 10 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

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