प्रभारी सचिव इमरान खान पर ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

प्रभारी सचिव इमरान पोत रहा पंचायती राज के मुंह पर कालिख, सरपंच ने खोली पोल

ग्रामीणों का आरोप बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करता सचिव व रोजगार सहायक इमरान 

अनपढ़ सरपंच का फायदा उठा रहा रोजगार सहायक

सरपंच का रजिस्टर्ड मोबाइल चला रहा रोजगार सहायक बिना काम के लगा रहा फर्जी बिल

भ्रष्टाचार के पर्याय बने रोजगार सहायक  के खिलाफ ग्रामीण लामबंद

सिवनी( ब्यूरो रिपोर्ट)-  भारत के सबसे बड़े स्वप्न दृष्टा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना को सच करने के उद्देश्य से पूरे देश में एक संविधान संशोधन कर पंचायती राज व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया गया। पंचायती राज में महात्मा गांधी जी के सपनों को सच करने के उद्देश्य से यह सुनिश्चित किया गया के ग्रामों को स्वावलंबी बनाने, विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गांव की सत्ता ग्रामीणों के हाथों में दिया जाए, तभी देश के सबसे बड़े लोकतंत्र में सत्ता और शक्ति का उपर्युक्त विकेंद्रीकरण हो सकेगा एवं विकास का प्रवाह ऊपरी स्तर से निचले स्तर में होने के बजाय निचले स्तर से ऊपर की ओर हो सके तो देश की लोकतांत्रिक प्रणाली सही मायनों में कारगर सिद्ध होगी। पंचायतीराज में विकास के सही प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए 2004 में पंचायती राज को अलग मंत्रालय का दर्जा दिया गया।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का विचार था कि सच्चा लोकतंत्र केन्द्र में बैठकर राज्य चलाने वाला नहीं होता अपितु यह तो गांव के प्रत्येक व्यक्ति के सहयोग से चलता है। लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी हमारा देश विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा नहीं हो पाया है क्या लोकतंत्र में सही मायनों में आम आदमी की सहभागिता सुनिश्चित नहीं हो पाई है? क्योंकि जिस प्रकार विकास का प्रवाह सुनिश्चित किया गया देश के गद्दारों और भ्रष्टाचारियों ने भ्रष्टाचार का प्रवाह भी प्रवाहित किया जो उच्च घटिया राजनीतिक संरक्षण में संचालित होता आ रहा है इसकी बानगी छोटे-बड़े स्तर में यदा-कदा देखने को मिलती हैं और पंचायती राज इन भ्रष्टाचारियों के लिए सबसे मुफीद साबित होता आ रहा है।

गौरतलब है कि लोकतंत्र की जड़ें पंचायती राज में हैं और पंचायती राज की जड़ों में भ्रष्टाचार बहुत गहराई तक समाहित है जब तक इस पर मट्ठा नहीं डाला जाएगा तब तक देश में भ्रष्टाचार पर काबू नहीं पाया जा सकता और न ही विकास के उस मॉडल या गांधी जी के सपनों को मूर्त रूप दिया जा सकेगा।

ज्ञात होवे कि पंचायती राज पर भ्रष्टाचारियों के द्वारा कालिख पोतने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं और कालिख पोतने वाले भ्रष्टाचारी जेल की सलाखों के पीछे भी अपने कर्मों की सजा भोग रहे हैं। इसी तरह पंचायती राज में भ्रष्टाचार की बानगी सिवनी जिले की जनपद पंचायत धनौरा के अंतर्गत ग्राम पंचायत गोरखपुर में देखने को मिली जो सुनवारा मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर है।

यहां पदस्थ रोजगार सहायक इमरान खान जो प्रभारी सचिव है एक कम पढ़े लिखे बहुत ही सीधे-साधे सरपंच बखतलाल के होने का गलत फायदा उठाते हुए भ्रष्टाचार की नई इबारतें लिख रहा है। जिसके काले कारनामों की अति होने के बाद अब ग्रामीणों ने उसके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विभिन्न स्तर पर शिकायतें और मीडिया के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए उक्त प्रभारी सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रशासन से मांग की है तो वही सबसे चैंकाने वाला तथ्य यह है कि सरपंच बखतलाल ने भी कैमरे के सामने भ्रष्टाचार की सारी पोल खोल कर रख दी है।

ग्रामीण हुए लामबंद, सचिव के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग

 

ग्राम पंचायत गोरखपुर के भ्रष्टाचारी रोजगार सहायक जो वर्तमान में सचिव के पद पर कार्य कर रहा है भ्रष्टाचार की नई-नई ईबारतें लिख रहा है। उच्च राजनीतिक संरक्षण प्राप्त उक्त प्रभारी सचिव इमरान की गुंडागर्दी और भ्रष्टाचारी कारनामों से परेशान ग्रामीणों ने अब इसके खिलाफ मुखरता से मोर्चा खोल दिया है और एक-एक करके उसके सारे भ्रष्टाचार की पोल कैमरे में बयां कर दी है। ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम बलपुरा निवासी मुस्ताक खान, गफूर खान ,गुलाबवती बाई समेत अनेकों ग्रामीणों ने आवास योजना में लाभ दिलाने के एवज में प्रभारी सचिव इमरान खान द्वारा अवैध तरीके से रिश्वत लेने का आरोप लगाया तो वहीं अन्य कई लोगों ने इमरान पर रिश्वत की डिमांड एवं निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं इसके साथ ही लगभग आधा सैकड़ा ग्रामीणों ने पीड़ित ग्रामीणों के सुर में सुर मिलाते हुए इमरान के भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है सभी ग्रामीणों ने मीडिया के सामने अपना दुखड़ा बयान करने के साथ-साथ सीएम हेल्पलाईन में व लिखित रूप से भी शिकायत उच्चाधिकारियों को प्रेषित की है जिसमें तत्काल इमरान को निलंबित कर उसके समस्त काले कारनामों की गहन जांच कर उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए सेवा समाप्ति की मांग प्रशासन से की है। तो वहीं सरपंच बखतलाल ने भी प्रभारी सचिव इमरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सचिव द्वारा उसको अंधेरे में रखते हुए उसका ओटीपी वाला मोबाइल ले लिया गया है और जमकर फर्जी बिल लगाकर शासकीय राशि का गोलमाल किया जा रहा है साथ ही भ्रष्टाचार के अनेकों गंभीर आरोप इमरान पर लगाते हुए सारी पोल खोल कर रख दी है।

उच्च राजनीतिक संरक्षण का नाजायज फायदा उठा रहा है इमरान

 

गोरखपुर का सचिव इमरान खान को उच्च राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। जिसके संबंधी एक राजनीतिक दल के बड़े-बड़े नेताओं के साथ उठते बैठते हैं नाजायज राजनीतिक संरक्षण के चलते इमरान बेखौफ तरीके से सरपंच को अंधेरे में रखकर फर्जी तरीके से बिलों का आहरण, फर्जी मजदूरों की हाजिरी, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य कराना, फर्जी बिल लगाना, हितग्राहियों से रिश्वत मांगना जैसे गंभीर भ्रष्टाचारी कार्य कर रहा है। इसके बावजूद इसे पूर्व में कलेक्टर द्वारा बेस्ट रोजगार सहायक के रूप में सम्मानित किया जा चुका है जिस पर प्रशासन की चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं तो वहीं यह रोजगार सहायक संघ का एक पदाधिकारी है जिसके ऊपर संघ के बड़े-बड़े लोगों का हाथ है। इन अनुचित संरक्षणों के चलते इसकी पोल अब तक नहीं खुल पाई थी इसका पाप का घड़ा छलका नहीं था चूंकि अब पाप का घड़ा भर चुका है तो छलखना भी लाजमी है। अब जबकि इसके भ्रष्टाचारी कारनामे उजागर हो रहे हैं तो यह बौखला गया है और उच्च राजनीतिक संरक्षण और सांठ-गांठ का हवाला देते हुए यहां वहां कहता फिर रहा है कि उसका कोई बाल बांका नहीं कर सकता उसकी जनपद से लेकर जिला पंचायत तक सांठ-गांठ है और जो भी ग्रामीण या ग्रामीणों के पक्ष में पत्रकार उसके खिलाफ जाएंगे उनके खिलाफ झूठे मुकदमे लदवा देगा।

एक अदने से रोजगार सहायक, प्रभारी सचिव की गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार की बानगी के बावजूद उसके बुलंद हौसले लोकतंत्र और पंचायती राज को चुनौती देने वाले हैं अब देखना यह है कि ईमानदार छवि के जिला पंचायत सीईओ सुनील दुबे कितनी जल्दी इस भ्रष्टाचारी रोजगार सहायक को उसके अंजाम तक पहुंचाते हैं?

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